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पीएफसी के बारे में

पीएफसी की स्थापना जुलाई,1986 को विद्युत क्षेत्र वित्तपोषण को समर्पित तथा विद्युत तथा इसके संबद्ध क्षेत्रों के एकीकृत विकास के लिए प्रतिबद्ध वित्तीय संस्थान के रूप में की गई    थी । निगम को कंपनी अधिनियम,1956 के अंतर्गत 1990 में सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के रूप में घोषित किया गया । निगम को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय निगम के रूप में पंजीकृत किया गया और भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने संशोधित प्रमाणपत्र सं0 बी-14.00004 दिनांक 28 जुलाई,2010 द्वारा कंपनी को " इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी(एनबीएफसी-एनडी-आईएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया गया ।
पीएफसी, जो वर्ष 2010 में अपने सिल्वर जुबली वर्ष में प्रवेश कर चुका है, विद्युत मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में वित्तीय सेवा क्षेत्र में अनुसूची-क, नवरत्न सीपीएसई(भारत सरकार द्वारा दिनांक 22 जून,2007 को प्रदत्त)है ।  उसका पंजीकृत एवं कॉर्पोरेट कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है ।
पीएफसी की स्थापना का उद्देश्य; विद्युत एवं उसके संबद्ध क्षेत्रों को वित्तीय संसाधन प्रदान करना तथा निवेश प्रवाह को बढ़ावा देना, वित्तीय,तकनीकी एवं प्रबंधकीय क्षेत्रों में अपने ग्राहकों के कार्य सुगम बनाने में सांस्थानिक सुधारों को पूरा करने के लिए उप्रेरक के रूप में कार्य करना ताकि उपलब्ध संसाधनों का इष्टतम उपयोगी सुनिश्चित हो, घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से प्रतियोगी दरों पर विभिन्न संसाधनों का जुटाव करना, क्षेत्र की प्रभावी एवं उन्नत प्रगति के लिए कार्यकुशलता को बढ़ाने पर बल देना, तथा और विद्युत क्षेत्र के लिए नए-नए  वित्तीय स्रोत एवं सेवाएं प्रारंभ करके प्रभावी कार्य प्रचालनों द्वारा अधिकतम वसूली दर (रेट ऑफ    रिटर्न )प्राप्त करना ।

उत्पाद एवं सेवाएं
पीएफसी उत्पादन, पारेषण, वितरण क्षेत्र संबंधी विभिन्न विद्युत परियोजनाओं तथा विद्यमान विद्युत परियोजनाओं के नवीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए परियोजना सावधि ऋण,लीज वित्तपोषण, डायरेक्ट डिस्काउंटिंग ऑफ बिल्स, अल्पावधि ऋण, तथा परामर्शी सेवाएं आदि जैसी व्यापक स्तर वाली वित्तीय उत्पाद एवं सेवाएं प्रदान कर रही है ।
पीएफसी की प्राथमिकताओं में शामिल है; उत्पादन, पारेषण तथा वितरण परियोजनाओं के वित्तपोषण के विद्यमान व्यापार की गति को न अपितु बढ़ना अथवा  कंर्सोशियम वित्तपोषण, उपस्कर विनिर्माताओं को वित्तपोषण तथा ईंधन उत्पादकों तथा आपूर्तिकत्ताओं, नवीकरणीय ऊर्जा तथा सीडीएम, तथा इक्विटी वित्तपोषण ।    
पीएफसी विद्युत क्षेत्र के व्यापक ज्ञान तथा अपने ग्राहकों को टेलर मेड उत्पाद एवं सेवाएं प्रदान करने संबंधी अपनी वित्तपोषण विशेज्ञता पर विशेष ध्यान रखता है ।  इसके अतिरिक्त, पीएफसी अपनी सब्सिडरी कंपनी नामशः पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड की गतिविधियों के माध्यम से तकनीकी, प्रबंधकीय सलाह तथा परामर्शी सेवाएं प्रदान करता है ।

 

भारत सरकार की पहल
अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजनाएं (यूएमपीपी)
पीएफसी को विद्युत मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा टैरिफ आधारित प्रतियोगी बिडिंग रूट के अंतर्गत लगभग 4000 मेगावाट प्रत्येक की क्षमता वाली अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है । विद्युत मंत्रालय  इन अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए सुविधादाता है जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण तकनीकी भागीदार है ।  इन परियोजनाओं का आकार बड़ा होने के कारण क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय ग्रिड पर विद्युत के पारेषण के माध्यम से देश की बिजली आवश्यकता पूरी हो सकेगी ।



पुनगर्ठित-त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम(आर-एपीडीआरपी)
विद्युत मंत्रालय,भारत सरकार ने जुलाई,2008 में पुनगर्ठित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आर-एपीडीआरपी) की शुरूआत की जिसमें 11 वीं योजना के दौरान उप-पारेषण एवं वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करने और उन्नयन करके तथा सूचना प्रौद्योगिकी अपनाने के माध्यम से आधारभूत आकड़ों की स्थापना,जबाबदेही के निर्धारण, एटी एवं सी हानियों को 15 प्रतिशत तक कम करने पर बल दिया गया । परियोजना क्षेत्र जनगणना,2001 के अनुसार 30,000 से अधिक आबादी वाले शहर(विशेष श्रेणी राज्यों के लिए 10,000 )होगा ।  परियोजना के अंतर्गत योजनाएं दो भागों में होगी । भाग-क में आधारभूत आकड़ों की स्थापना, और ऊर्जा लेखाकरण/ लेखा परीक्षा हेतु सूचना प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उपभोक्ता सेवा केंद्र की स्थापना हेतु परियोजना शामिल है । भाग-ख में नियमित वितरण सुदृढ़ीकरण परियोजना शामिल है और प्रणाली सुधार, सुदृढ़ीकरण और संवर्धन आदि शामिल होंगे ।
आर-एपीडीआरपी के अंतर्गत कार्यक्रम के प्रचालनीकरण के लिए पीएफसी को नोडल एजेंसी बनाया गया है और यह सिंगल विंडो के रूप में कार्य करेगा । नोडल एजेंसी के रूप में आर-एपीडीआरपी संचालन समिति द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार कार्यक्रम के कार्यान्वयन में फीस एवं व्यय की प्रतिपूर्त्ति लेगा ।

स्वतंत्रण पारेषण परियोजनाएं (आईटीपी)
विद्युत मंत्रालय ने निजी क्षेत्र सहभागिता के माध्यम से पारेषण प्रणाली के विकास और सुदृढ़ीकरण हेतु टैरिफ आधारित प्रतियोगी बोली प्रक्रिया शुरू की है ।
इस पहल का उद्देश्य भारत में पारेषण क्षमताओं का विकास करना है और प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य, रूट की पहचान, सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करना, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ करने, वन अनुमति,यदि आवश्यक हो,लेने की प्रक्रिया आरंभ करने और बोली प्रक्रिया करने आदि कार्य करके परियोजनाओं को विकसित करने के बाद संभावित निवेशकों को आगे लाना है । पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड (पीएफसीसीएल), पीएफसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, को विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार ने स्वतंत्र पारेषण परियोजना के विकास के लिए " बोली प्रक्रिया समन्वयक " नामित किया है ।

वितरण सुधार, उन्नयन एवं प्रबंध(ड्रम)
वितरण सुधार, उन्नयन एवं प्रबंध(ड्रम) परियोजना भारत-अमेरिका की संयुक्त पहल है जिसे विद्युत मंत्रालय तथा संयुक्त राज्य अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी(यूएसएआईडी) द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन किया गया है । यह विद्युत मंत्रालय के त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (एपीडीआरपी) की पूरक परियोजना है । ड्रम परियोजना वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य एवं स्वतंत्र विद्युत उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण विकास चुनौती को पूरा करती है ।
ड्रम परियोजना का समग्र लक्ष्य है वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य विद्युत वितरण प्रणाली का प्रदर्शन करना जो ग्राहकों को पर्याप्त गुणवत्ता वाली विश्वसनीय विद्युत उपलब्ध कराती है और ड्रम गतिविधियों एवं कार्यक्रम के लिए स्वतंत्र वित्तपोषण उपलब्ध कराने के लिए भारतीय वित्तीय संस्थानों द्वारा अपनाई गई वाणिज्यिक फ्रेमवर्क एवं दोहरी प्रणाली स्थापित करना ।
पीएफसी को ड्रम परियोजना के अंतर्गत तकनीकी सहायता एवं प्रशिक्षण के लिए जिम्मेदार मुख्य वित्तीय मध्यस्थ कंपनी नियुक्त किया गया है । ड्रम परियोजना के लिए पीएफसी की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां इस प्रकार है -
1) प्रबंधकीय एवं कार्यान्वयन सहायता प्रदान करना,
2) सभी स्टेकधारकों के साथ समन्वय स्थापित करना
3) निधियों(ऋणों एवं अनुदान) के नियत्रंण एवं निर्देशन के लिए वित्तीय मध्यस्थ संस्था एवं बैंकर के रूप में कार्य करना और
4) अन्य वित्तीय संस्थानों/ बैंकरों के संसाधनों में संतुलन स्थापित कराने के प्रणाली तैयार करना ।


विकेन्द्रीकृत प्रबंधन के माध्यम से सुपुर्दगी (डीडीएम)
विकेन्द्रीकृत प्रबंधन के माध्यम से सुपुर्दगी(डीडीएम) विद्युत मंत्रालय द्वारा प्रायोजित स्कीम है जिसका उद्देश्य मुख्य रूप से स्थानीय आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं की दृष्टि से संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभागी वितरण उत्कृष्टता मॉडल का प्रदर्शन करना है । पीएफसी को डीडीएम स्कीमों के सफल कार्यान्वयन के लिए वाहक एजेंसी नियुक्त किया गया है ।

ये वेबसाइट पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (भारत सरकार का उपक्रम) से संबंधित है ।
अंतिम नवीनीकरण दिनांक : 17/05/2012